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Manusmriti

287 участников
✨ ʙʜᴀɢᴀᴠᴀᴅ ɢɪᴛᴀ 16.5 ✨ दैवी सम्पद्विमोक्षाय निबन्धायासुरी मता | मा शुचः सम्पदं दैवीमभिजातोऽसि पाण्डव ||१६-५|| 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ ।।16.5।। हे पाण्डव ! दैवी सम्पदा मोक्ष के लिए और आसुरी सम्पदा बन्धन के लिए मानी गयी है, तुम शोक मत करो, क्योंकि तुम दैवी सम्पदा को प्राप्त हुए हो।। 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
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✨ ᴀꜱʜᴛᴀᴠᴀᴋʀᴀ ɢɪᴛᴀ 1.4 ✨ यदि देहं पृथक् कृत्य चिति विश्राम्य तिष्ठसि। अधुनैव सुखी शान्तो बन्धमुक्तो भविष्यसि॥ 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ यदि आप स्वयं को इस शरीर से अलग करके, चेतना में विश्राम करें तो तत्काल ही सुख, शांति और बंधन मुक्त अवस्था को प्राप्त होंगे॥ 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
✨ ʙʜᴀɢᴀᴠᴀᴅ ɢɪᴛᴀ 15.11 ✨ यतन्तो योगिनश्चैनं पश्यन्त्यात्मन्यवस्थितम् | यतन्तोऽप्यकृतात्मानो नैनं पश्यन्त्यचेतसः ||१५-११|| 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ ।।15.11।। योगीजन प्रयत्न करते हुये ही अपने हृदय में स्थित आत्मा को देखते हैं, जब कि अशुद्ध अन्त:करण वाले और अविवेकी लोग यत्न करते हुये भी इसे नहीं देखते हैं।। 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
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✨ ᴀꜱʜᴛᴀᴠᴀᴋʀᴀ ɢɪᴛᴀ 8.2 ✨ तदा मुक्तिर्यदा चित्तं न वांछति न शोचति। न मुंचति न गृण्हाति न हृष्यति न कुप्यति॥ 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ तब मुक्ति है जब मन इच्छा नहीं करता है, शोक नहीं करता है, त्याग नहीं करता है, ग्रहण नहीं करता है, प्रसन्न नहीं होता है या क्रोधित नहीं होता है॥ 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
✨ ʙʜᴀɢᴀᴠᴀᴅ ɢɪᴛᴀ 3.18 ✨ नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन | न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयः ||३-१८|| 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ ।।3.18।। इस जगत् में उस पुरुष का कृत और अकृत से कोई प्रयोजन नहीं है और न वह किसी वस्तु के लिये भूतमात्र पर आश्रित होता है।। 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
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✨ ᴀꜱʜᴛᴀᴠᴀᴋʀᴀ ɢɪᴛᴀ 13.7 ✨ सुखादिरूपा नियमं भावेष्वालोक्य भूरिशः। शुभाशुभे विहायास्मादह- मासे यथासुखम्॥ 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ सुख, दुःख आदि स्थितियों के क्रम से आने के नियम पर बार बार विचार करके, शुभ और अशुभ की प्रवृत्तियों को छोड़कर सभी स्थितियों में, मैं सुखपूर्वक विद्यमान हूँ॥ 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
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काली दुर्गे राधे श्याम गोरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गोरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गोरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गोरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गोरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गोरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गोरी शंकर सीता राम
✨ ʙʜᴀɢᴀᴠᴀᴅ ɢɪᴛᴀ 16.18 ✨ अहंकारं बलं दर्पं कामं क्रोधं च संश्रिताः | मामात्मपरदेहेषु प्रद्विषन्तोऽभ्यसूयकाः ||१६-१८|| 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ ।।16.18।। अहंकार, बल, दर्प, काम और क्रोध के वशीभूत हुए परनिन्दा करने वाले ये लोग अपने और दूसरों के शरीर में स्थित मुझ से द्वेष करने वाले होते हैं।। 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
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✨ ᴀꜱʜᴛᴀᴠᴀᴋʀᴀ ɢɪᴛᴀ 5.4 ✨ समदुःखसुखः पूर्ण आशानैराश्ययोः समः। समजीवितमृत्युः सन्- नेवमेव लयं व्रज॥ 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ स्वयं को सुख और दुःख में समान, पूर्ण, आशा और निराशा में समान, जीवन और मृत्यु में समान, सत्य जानकर ब्रह्म से योग को प्राप्त करो ॥ 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
✨ ʙʜᴀɢᴀᴠᴀᴅ ɢɪᴛᴀ 17.25 ✨ तदित्यनभिसन्धाय फलं यज्ञतपःक्रियाः | दानक्रियाश्च विविधाः क्रियन्ते मोक्षकाङ्क्षिभिः ||१७-२५|| 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ ।।17.25।। 'तत्' शब्द का उच्चारण कर, फल की इच्छा नहीं रखते हुए, मुमुक्षुजन यज्ञ, तप, दान आदि विविध कर्म करते हैं।। 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
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✨ ᴀꜱʜᴛᴀᴠᴀᴋʀᴀ ɢɪᴛᴀ 5.2 ✨ उदेति भवतो विश्वं वारिधेरिव बुद्बुदः। इति ज्ञात्वैकमात्मानं एवमेव लयं व्रज॥ 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ जिस प्रकार समुद्र से बुलबुले उत्पन्न होते हैं, उसी प्रकार विश्व एक आत्मा से ही उत्पन्न होता है। यह जानकर ब्रह्म से योग को प्राप्त करो॥ 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
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✨ ʙʜᴀɢᴀᴠᴀᴅ ɢɪᴛᴀ 12.11 ✨ अथैतदप्यशक्तोऽसि कर्तुं मद्योगमाश्रितः | सर्वकर्मफलत्यागं ततः कुरु यतात्मवान् ||१२-११|| 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ ।।12.11।। और यदि इसको भी करने के लिए तुम असमर्थ हो, तो आत्मसंयम से युक्त होकर मेरी प्राप्ति रूप योग का आश्रय लेकर, तुम समस्त कर्मों के फल का त्याग करो।। 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
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✨ ᴀꜱʜᴛᴀᴠᴀᴋʀᴀ ɢɪᴛᴀ 11.1 ✨ अष्टावक्र उवाच भावाभावविकारश्च स्वभावादिति निश्चयी। निर्विकारो गतक्लेशः सुखेनैवोपशाम्यति॥ 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ भाव और अभाव रूपी विकार स्वाभाविक हैं, ऐसा निश्चित रूप से जानने वाला विकाररहित, दुखरहित होकर सुख पूर्वक शांति को प्राप्त हो जाता है॥ 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
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✨ ʙʜᴀɢᴀᴠᴀᴅ ɢɪᴛᴀ 14.11 ✨ सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजायते | ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत ||१४-११|| 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ ।।14.11।। जब इस देह के द्वारों अर्थात् समस्त इन्द्रियों में ज्ञानरूप प्रकाश उत्पन्न होता है, तब सत्त्वगुण को प्रवृद्ध हुआ जानो।। 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
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✨ ᴀꜱʜᴛᴀᴠᴀᴋʀᴀ ɢɪᴛᴀ 5.3 ✨ प्रत्यक्षमप्यवस्तुत्वाद् विश्वं नास्त्यमले त्वयि। रज्जुसर्प इव व्यक्तं एवमेव लयं व्रज॥ 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ यद्यपि यह विश्व आँखों से दिखाई देता है परन्तु अवास्तविक है। विशुद्ध तुम में इस विश्व का अस्तित्व उसी प्रकार नहीं है जिस प्रकार कल्पित सर्प का रस्सी में। यह जानकर ब्रह्म से योग को प्राप्त करो ॥ 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
✨ ʙʜᴀɢᴀᴠᴀᴅ ɢɪᴛᴀ 2.30 ✨ देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत | तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि ||२-३०|| 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ ।।2.30।। हे भारत ! यह देही आत्मा सबके शरीर में सदा ही अवध्य है, इसलिए समस्त प्राणियों के लिए तुम्हें शोक करना उचित नहीं।। 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
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✨ ᴀꜱʜᴛᴀᴠᴀᴋʀᴀ ɢɪᴛᴀ 20.5 ✨ क्व कर्ता क्व च वा भोक्ता निष्क्रियं स्फुरणं क्व वा। क्वापरोक्षं फलं वा क्व निःस्वभावस्य मे सदा॥ 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ सदा स्वभाव से रहित मुझमें कौन कर्ता है और कौन भोक्ता, क्या निष्क्रियता है और क्या क्रियाशीलता, क्या प्रत्यक्ष है और क्या अप्रत्यक्ष॥ 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
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✨ ʙʜᴀɢᴀᴠᴀᴅ ɢɪᴛᴀ 7.7 ✨ मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय | मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव ||७-७|| 📘 ᴛʀᴀɴꜱʟᴀᴛɪᴏɴ ।।7.7।। हे धनंजय ! मुझसे श्रेष्ठ अन्य किचिन्मात्र वस्तु नहीं है। यह सम्पूर्ण जगत् सूत्र में मणियों के सदृश मुझमें पिरोया हुआ है।। 🙏 ᴊᴀɪ ꜱʜʀᴇᴇ ᴋʀɪꜱʜɴᴀ
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- कल जितेंद्र प्रताप सिंह का एक ट्वीट देखा उन्होंने लिखा कि मैंने मेडिकल टेस्ट के पहले राउंड का रिजल्ट विश्लेषण किया तो पाया कि EWS में पहले 30 प्रतिशत मुस्लिम चयनित हुए हैं जबकि EWS को सुदामा कोटा कहा जाता है । इससे पहले पवन सक्सेना भाई ने भी आंकड़े दिए थे कि कैसे EWS से मुस्लिम IAS चुने जा रहे हैं । कुल मिलाकर मेरा मानना है कि EWS सुदामा कोटा नहीं है ये अब्दुल कोटा बन चुका है और फिर इसी के साथ मैं सोशल मीडिया पर उन सामान्य वर्ग के लोगों की भीड़ को भी देख रहा हूं जो आर्थिक आधार पर रिजर्वेशन मांग रही हैं । अगर ऐसा लागू हो जाए तो देश में 30 से 40 प्रतिशत भर्तियों पर मुसलमान ही काबिज हो जाएंगे । इस बिंदु पर सामान्य वर्ग के आंदोलनकारियों का ध्यान ही नहीं है । इस संकट का रास्ता क्या है ? इस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है । -दिलीप पाण्डेय
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मेरे सभी सनातनी भाइयों से एक छोटी सी अपील ❤️🙏 आप सभी को मैं HinduText.in पर invite करता हूँ। यहाँ हम एक ही जगह पर सनातन धर्म से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं, सवालों के जवाब दे सकते हैं और अलग-अलग बातों की सच्चाई समझ सकते हैं। यहाँ आपको मिलेगा • Myths Debunking • Ask Questions • Answer Questions • भगवद्गीता, वेद और उपनिषद के शास्त्र पाठ • सनातन धर्म से जुड़ा और भी बहुत कुछ कोशिश बस इतनी है कि सनातन धर्म से जुड़ी सही जानकारी और ज्ञान एक ही जगह आसानी से मिल सके। एक बार जरूर विजिट करें 👉 HinduText.in 🙏❤️
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*🚩जयते हिंदू राष्ट्रम्* *हिंदुत्व पर भारी राष्ट्रवाद* -------------------- 1947 के समय के मूर्ख हिंदुओं और वर्तमान समय के मूर्ख हिंदुओं में कितनी ज्यादा समानता है। सबसे अधिक हिंदू ही अंग्रेजों से लड़ाई लड़ रहे थे जबकि हिंदुओं को वास्तविक खतरा मुसलमानों से था। भारत में सबसे ज्यादा स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी हिंदू ही थे। जिन अंग्रेजो ने हिंदुओं को मुगलों के अत्याचारी शासन से मुक्ति दिलाया वे उन्हीं से लड़ रहे थे। उन दिनों हिंदुओं में क्रांतिकारी बनना एक फैशन बन गया था। बंगाली पंजाबी हिंदू राष्ट्रवाद और देशभक्ति के नशा में जी रहे थे और वास्तविक खतरा इस्लामिक जिहाद से मुंह मोड़ रहे थे। नोआखली और डायरेक्ट एक्शन डे में बंगाल के क्रांतिकारी, मुस्लिम जिहादियों का सामना नहीं कर पाए। परिणाम क्या हुआ बंगाली हिंदुओं का बहुत बड़ा नरसंहार हुआ और बंगाली हिंदुओं को अपनी 60% जमीन खोना पड़ा। ठीक उसी प्रकार की परिस्थितियों हिंदुओं के समक्ष उत्पन्न हो गई है। हिंदू वास्तविक जमीनी समस्याओं से मुंह मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हिंदू युवा राष्ट्रवाद, देशभक्ति, विकास के नशे में अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों, लव  जेहाद से जानबूझ कर अनजान बने हुए है। भारत में हिंदुओं के नरसंहार की शुरुआत हो चुकी है। अभी यह ट्रायल मोड में है दो-तीन साल के अंदर बहुत बड़े पैमाने पर नरसंहार होगा। स्वतंत्रता के समय भी कांग्रेस राष्ट्रवाद की बात करती थी, पर भारत की स्वतंत्रता की कीमत पाकिस्तान में छूट गये हिंदू सिक्खों को चुकानी पड़ी थी। लाखों हिंदू सिक्ख मुसलमानों द्वारा मारे गये। गांधी, नेहरू भारत की स्वतंत्रता की बात करते थे। लोगों को पसंद थे। पर सावरकर असली खतरा मुसलमान को बताते थे, जो सच साबित हुआ। आज भी वही परिस्थितियां हैं पर राजनीतिक दल राष्ट्रवाद की बात कर रहे हैं। विकास के वादे कर रहे हैं। पर हिंदू ही नहीं बचेगा तो राष्ट्रवाद को चाटना है? *हिंदू राष्ट्र के सिवा कुछ भी कर लो हिंदुओं का अस्तित्व नहीं बचने वाला।* 🙏 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 〰️〰️ *जय श्री राम* 🚩 *एक ही लक्ष्य हिन्दुराष्ट्र*🚩 🚩 Join us in the mission of establishing Hindu Rashtra : हिंदू राष्ट्र पर विचार आमंत्रित हैं...
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