शिवांश: ईश्वर सब कुछ देख रहा है
अग्निव्रत: उसकी आँख ही नहीं है
समाजी: वाह वाह वाह वाह
मुमुक्षु: ईश्वर सब कुछ कर रहा करवा रहा है
अग्निव्रत: उसके हाथ ही नहीं है
समाजी: वाह वाह वाह वाह
आर्य समाजी: वेद ईश्वर की वाणी है
अग्निव्रत: उसका मुंह ही नहीं है
समाजी:👇🏼