स्वतंत्र भारत में भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन से जुड़े प्रमुख तथ्य:
पहला भाषाई राज्य (1953): 1 अक्टूबर 1953 को आंध्र प्रदेश का गठन हुआ। यह मद्रास राज्य के तेलुगु-भाषी क्षेत्रों को अलग करके बनाया गया था। इसके लिए पोट्टी श्रीरामुलु ने 56 दिनों का आमरण अनशन किया था, जिसके बाद उनका निधन हो गया था।
राज्य पुनर्गठन आयोग (1953): आंध्र प्रदेश के गठन के बाद भाषाई आधार पर नए राज्यों की मांग बढ़ने लगी। दिसंबर 1953 में केंद्र सरकार ने फजल अली की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय राज्य पुनर्गठन आयोग गठित किया (अन्य दो सदस्य: के. एम. पणिक्कर और एच. एन. कुंजरू)।
राज्य पुनर्गठन अधिनियम (1956): आयोग की सिफारिशों के आधार पर 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम और 7वां संविधान संशोधन पारित हुआ, जिसके तहत देश को 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया।
प्रमुख भाषाई विभाजन:
1960 (महाराष्ट्र और गुजरात): द्विभाषी बॉम्बे राज्य का विभाजन कर मराठी भाषियों के लिए महाराष्ट्र और गुजराती भाषियों के लिए गुजरात बनाया गया।
1966 (हरियाणा और पंजाब): शाह आयोग की सिफारिश पर पंजाबी भाषी क्षेत्र से पंजाब और हिंदी भाषी क्षेत्र को अलग कर हरियाणा बनाया गया।