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˚₊· ➳❥♥𝆺𝅥𝆺𝅥𖤓꯭፝𝑾𝒉𝒊𝒔𝒑𝒆𝒓𝒊𝒊𝒏𝒈❃𝑯𝒆𝒂𝒓𝒕𝒔𖤓꯭፝𝆺𝅥𝆺𝅥♥ ✧

3 362 members
28 July 2026
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▣ 𝗦𝘁𝗿𝗲𝗮𝗺𝗶𝗻𝗴 ▣ 𝖳𝗂𝗍𝗅𝖾 : कहाँ बाड़ी धनिया हमार - ▣ 𝖣𝗎𝗋𝖺𝗍𝗂𝗈𝗇 : 4:42 𝖬𝗂𝗇𝗎𝗍𝖾𝗌 ▣ 𝖱𝖾𝗊𝗎e𝗌𝗍𝖾𝖽 𝖡𝗒 : 𝑴𝒓. 𝑳𝒖𝒄𝒊𝒇𝒆𝒓
bol tere Tuu bole bol mere te kankar se, Dil ne laage mere saare vaa pathar se. Jab-jab khole tuu jubaan ne apni, Shabd laage manne ve saare khanjar se. Jo-jo bole bol tuu mere te pher, Rahve kai dinaa tak har bol kaa asar se. Soch-soch ke mera dil ghabraave se, Har lamhaa laage manne yo bhayankar se. #ankitgurjar009
आस्था इतनी प्रचंड रखो कि जब आप मौन हो जाओ तो उत्तर आपके आराध्य दें.. जय श्री कृष्णा🦚
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╥────────────━❥ ╰─❀⊰╮       🍃💓🍃 हम फूलों जेसे नहीं लेकिन महकना जरूर जानते हैं , गम रखना नहीं भुलाना जानते हैं , हम किसी से मिल तो नहीं पाते लेकिन मिले बिना भी ,रिश्ते निभाना जरूर जानते है....!!!       🍃💓🍃 ╭─❀⊰╯ ╨────────────━❥
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╥────────────━❥ ╰─❀⊰╮       🍃💓🍃 ❣️खोना नहीं चाहती मैं तुम्हें कभी।❣️ ❣️तुम मेरी सुबह और तुम ही मेरी ढलती शाम हो।❣️ ❣️इस मोहब्बत में इस कदर डूबे हैं हम।❣️ ❣️कि अब मेरे हर सांस पर सिर्फ तुम्हारा नाम हो।❣️       🍃💓🍃 ╭─❀⊰╯ ╨────────────━❥
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╥────────────━❥ ╰─❀⊰╮       🍃💓🍃 ❣️खोना नहीं चाहती मैं तुम्हें कभी।❣️ ❣️तुम मेरी सुबह और तुम ही मेरी ढलती शाम हो।❣️ ❣️इस मोहब्बत में इस कदर डूबे हैं हम।❣️ ❣️कि अब मेरे हर सांस पर सिर्फ तुम्हारा नाम हो।❣️       🍃💓🍃 ╭─❀⊰╯ ╨────────────━❥
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𝑹𝒖𝒉 𝑺𝒆 🤍 आजकल मोहब्बत में जिस्म जल्दी मिल जाते हैं... मगर रूह से मिलने वाले लोग बहुत कम रह गए हैं। हाथ थामने से पहले, दिल थामना ज़रूरी था... अब दिल की बातें कम, और चाहत की जल्दी ज़्यादा है। मोहब्बत कभी सिर्फ़ पास आने का नाम नहीं थी... वो तो किसी की इज़्ज़त करना, उसकी ख़ामोशी समझना, और बिना किसी शर्त उसका साथ निभाना भी थी। जिस रिश्ते की नींव सिर्फ़ चाहत-ए-जिस्म पर रखी जाए, वो वक़्त के साथ ढह जाता है... मगर जो रिश्ता रूह से जुड़ जाए, उसे दूरियाँ भी कमज़ोर नहीं कर पातीं। क्योंकि... जिस्म वक्त के साथ बदल जाते हैं, मगर रूह से की गई मोहब्बत उम्र भर साथ चलती है। ───── ✦ ───── © 𝐕𝐄𝐑𝐒𝐄 𝐕𝐈𝐁𝐄 #alfaz 🤍
• सलाह हारने वाले से लिया करें जीतने वाले मुश्किलों के बारे में नहीं बताते....!! ✨🙏🏻
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Evening ka mosum 🌧
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[♥️]🍃 ज़रुरी है तेरे          अहसास की खुशबु               मेरे अल्फाज़ो के लिए...[♥️]🌿 [♥️] ..... क्यूंकि....🌿 [ ♥️]🍃 तुम बिन हर             शायरी अधूरी                      है मेरी...[♥️]🌿 ❰━━━━━━━━●✿●━━━━━━━━❱  💜.Alana KHAN.. 🤍  ꯭    ❰━━━━━━━━●✿●━━━━━━━━❱
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_*असाढ़ बीतने को है, एक नया मास लगने वाला है। वह मास जो अवढरदानी को बहुत प्रिय है, वह मास सावन सुहावन ही तो है।*_ आसमान से बरसते अमृत को पीकर धरती की कोख हरी हो जाती है। सावन महीने के प्रत्येक दिन उल्लास उत्पादन और सांस्कृतिक समृद्धता के अवसर हैं। इस ऋतु को धरती का प्रजनन काल माना जाता है। नए पौधे धरती के गर्भ में पलते हैं, कुछ समय बाद धरती का आँचल हरा हो जाता है। रस की बरसात से मनुष्य ही नही कीट पतंगे तक विभोर हो जाते हैं। भोलेनाथ के सारे गण इस मौसम में मस्त होकर झूमते हैं, पात पात पुलकित होता है। इस महीने में नागपंचमी से कजरी तीज तक कजरी गाई जाती है, जौ के बीज बोना जरई डालना भी इसी दिन होता है। कजरी गाना भी इसी दिन से शुरू हो जाता है। बाद में कजरी तीज पर कजरी त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। नागपंचमी, रक्षाबंधन के त्यौहार में महिलाएँ खासकर लड़कियाँ कजरी गुनगुनाने लगती हैं। कजरी के मौसम में पुरुष अपने कजरी के कार्यक्रम शुरू कर देते हैं। लड़कियाँ नागपंचमी के दिन जौ के बीज बोती हैं इस प्रथा को ‘जरई डालना’ बोला जाता है। रक्षाबंधन के तीसरे दिन जरई को वो नदी या तालाब में बहाने जाती हैं और साथ ही कजरी गाती हैं, तालाब में बहाने के बाद घर वापस आते समय थोड़ी सी जरई अपने साथ ले आती हैं। लड़कियाँ जरई को अपने भाई, चाचा, पिता व अन्य रिश्तेदार के कान पर रखती हैं। यही लोग उनको नेग के रूप में कपड़े, पैसे व अन्य वस्तु भेंट करते हैं फिर सब साथ में कजरी गाते-सुनते हैं। सावन में कजरी का विशेष पर्व होता है जिसमें बालिकायें नागपंचमी के दिन जौ के बीज रोपती हैं, व नीम के पेड़ के नीचे जरई माँ की स्तुति में रतजागा और उनकी स्तुति में सामूहिक कजरी व देवी गीत गाती हैं। सावन की मौनापंचमी (नागपंचमी) के दिन दूध, धान की खील आदि से विषहरा भगवती (मनसा देवी) की मौन रहकर पूजा की जाती है। नागपंचमी से पहले अखाड़े सज जाते हैं और सावन भादों के भोज्य पदार्थ बखीर (चावल और गुड़ से बनता है) साथ में बेढ़नी (दालभरी पूड़ी) की रोटी का स्वाद वही जान सकता जिसने खाया हो । रात में गोईंठा (उड़द से बनता है ) भी बनता है जिसको बासी खाने का मजा ही कुछ और होता है। सांझ को कजरी का कार्यक्रम सब बारिश की बूँदा बाँदी में.. कजरी बताशा सी घुलने लगती है... रस धीरे धीरे बरसे बदरवा ना.… हो बरसे बदरवा ना.… हो बरसे बदरवा ना.…
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▣ 𝗦𝘁𝗿𝗲𝗮𝗺𝗶𝗻𝗴 ▣ 𝖳𝗂𝗍𝗅𝖾 : Rahat Fateh Ali Khan- B ▣ 𝖣𝗎𝗋𝖺𝗍𝗂𝗈𝗇 : 1:16:03 𝖬𝗂𝗇𝗎𝗍𝖾𝗌 ▣ 𝖱𝖾𝗊𝗎e𝗌𝗍𝖾𝖽 𝖡𝗒 : ᯓ ⃪꯭♔︎༎꯭Ⲙᛧ𖾗𝆆𖾗𝆆⸙‌ٖٖٖٖٖٖٜ❛꧊꯭᱂ⱺყ꯭꯭֟፝᧘ᥣ꯭❥๋๋๋๋๋๋๋๋๋๋𝐐ʋᧉᧉꪀ꯭ᡣ‌𐭩꯭𝆆𓆪꯭‌ໍ𞋯⸙
हर बार मुझे ही कसूरवार ठहराया गया, शायद मोहब्बत में मेरा जुर्म सिर्फ़ वफ़ादारी था। 💔🥀 Kanha ✍️
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हर बार मुझे ही कसूरवार ठहराया गया, शायद मोहब्बत में मेरा जुर्म सिर्फ़ वफ़ादारी था। 💔🥀 Kanha ✍️
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𝐿 𝞲 𝟆 𝞮 :) 💫 Dear सखी 🥳 समाज तुम्हारे लिए कंगन पायल घुंघट चुनेगा तुम कलम किताब और अपनी पहचान चुनना....!! ❤️🤌 мєєт...✍️
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𝐿 𝞲 𝟆 𝞮 :) 💫 Dear सखी 🥳 समाज तुम्हारे लिए कंगन पायल घुंघट चुनेगा तुम कलम किताब और अपनी पहचान चुनना....!! ❤️🤌 мєєт...✍️
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