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Yahan alfaaz nahi, ehsaas milte hain,
Ajnabi bhi dheere-dheere khaas milte hain. 🤍
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पहले तो मौसम भी अपना-सा लगा करता था, एक ही छाँव में बैठकर दिल हँसा करता था। फिर जाने किस मोड़ पर हवाएँ बदलने लगीं, कुछ ख़ामोशियाँ थीं जो दूरियाँ कहने लगीं। वही चेहरे, वही रास्ते, वही मुलाक़ातें रहीं, बस आँखों में पहले जैसी वो बात न रही। एक …एक पुरानी तस्वीर थी, धूल में दबी हुई, मगर उसमें एक पूरी ज़िंदगी थी जमी हुई। चेहरे वही थे, मगर वक़्त बदल चुका था, जो कल अपना था, आज यादों में ढल चुका था। तस्वीर में हँसी थी, आँखों में उजाला था, तब कहाँ पता था—ये पल ही आख़िरी निवाला था। कुछ ल…शहर रोशन बहुत है, मगर दिलों में अँधेरा क्यों है, चेहरे इतने हैं यहाँ, फिर इंसान इतना अकेला क्यों है। मज़हब, जात और दौलत ने दीवारें तो खड़ी कर दीं, मगर गिरते हुए इंसान को थामने वाला हाथ कहाँ है? भूख से कोई सोए, तो महलों में नींद कैसी, किसी क…मैं घूँघट के खिलाफ हूं, क्योंकि सम्मान चेहरे छुपाने से नहीं, नीयत साफ रखने से मिलता है। मैं कन्यादान के खिलाफ हूं, क्योंकि बेटियाँ वस्तु नहीं होतीं, वे किसी घर की धड़कन होती हैं। मैं ऐसी शादी के खिलाफ हूं, जहाँ फेरे तो हों, मगर प्रेम और सम्…मुलाक़ात हो तो ऐसी हो, जहाँ वक़्त को भी ठहरने की चाह हो। न कोई जल्दबाज़ी, न कोई सवाल हो, बस आँखों में आँखें और दिल में ख़याल हो। कुछ बातें लफ़्ज़ों से कही जाएँ, कुछ ख़ामोशी में समझी जाएँ। हँसी की वजह भी वही हो, और उस पल की फ़िज़ा भी नई हो। …सड़कें तो बस रास्ते देती रहीं, मुसाफ़िर अपनी मंज़िलें ढूँढ़ता रहा। कभी धूप में जलता रहा, कभी बारिश में चलता रहा, कभी गिरता रहा, फिर भी ख़ुद को संभालता रहा। कुछ रास्ते अपने थे, कुछ अजनबी निकले, कुछ लोग साथ चले, कुछ बीच सफ़र ही बिछड़ निकले। क…All posts →For the owner: statistics link and badge →
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