ऐ ज़िंदगी, तबाह है ज़िंदगी...
ऐ ज़िंदगी, तबाह है ज़िंदगी,
लोगों के फ़रेब में बर्बाद है ज़िंदगी।
सोच-समझकर करना भरोसा यहाँ,
चेहरों के पीछे छिपा एक और चेहरा है यहाँ।
पहले अपने कहकर गले लगाते हैं,
फिर वक़्त बदलते ही पराया बताते हैं।
मतलब निकल जाए तो रिश्ते बदल जाते हैं,
कल जो साथ थे, आज नज़रें चुरा जाते हैं।
झूठ की महफ़िल में सच अकेला रह जाता है,
हर मुस्कान के पीछे कोई राज़ छिप जाता है।
अब तो दिल भी सोचकर धड़कता है,
हर इंसान पर यक़ीन करने से डर लगता है।
फिर भी हिम्मत मत हार ऐ दिल,
हर शख़्स बेवफ़ा नहीं होता।
कुछ लोग आज भी दुआ बनकर मिलते हैं,
जो टूटे हुए इंसानों को फिर से जीना सिखाते हैं।
✍️ Koshal verma