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🍁🥀शायरों की टोली🌹🍾

сообщение · 2026-07-31 15:41 UTC
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💔हर रात खुद से एक सवाल होता है…💔 हर रात खुद से एक सवाल होता है, क्यों मैं ही अकेला हूँ? भीड़ तो बहुत है इस दुनिया में, फिर भी दिल इतना तन्हा क्यों है? मेरे प्यारे Members, रात की ख़ामोशी जब चारों ओर फैल जाती है, तब दिल उन सवालों से मिल बैठता है जिनका जवाब दिन के शोर में कभी नहीं मिल पाता। कभी सोचता हूँ, क्या मेरी कमी थी? क्या मेरी ख़ामोशी गलत थी? या फिर वक़्त का यही फ़ैसला था कि कुछ रास्ते अकेले ही तय करने होंगे। लोग आते रहे, कुछ मुस्कुराकर मिले, कुछ वादे करके चले गए, और कुछ बिना कुछ कहे यादों का हिस्सा बन गए। तब समझ आया अकेलापन हमेशा हार की निशानी नहीं होता, कई बार यह खुद को पहचानने की शुरुआत होता है। इस सफ़र ने सिखाया कि हर साथ हमेशा नहीं रहता, हर रिश्ता उम्रभर नहीं चलता, और हर उम्मीद पूरी नहीं होती। फिर भी ज़िंदगी रुकती नहीं। हर सुबह एक नया अवसर लेकर आती है, हर शाम एक नई सीख देकर जाती है। धीरे-धीरे दिल भी सीख जाता है कि अपनी मुस्कान की वजह खुद बनना कितना ज़रूरी है। अब अगर कोई साथ चले, तो दिल से चले। अगर कोई दूर हो जाए, तो उसकी याद रहे, लेकिन अपनी राह न रुके। क्योंकि मंज़िल उन्हीं को मिलती है जो टूटकर भी चलना नहीं छोड़ते। आख़िर में बस इतना ही… हर रात खुद से एक सवाल होता है क्यों मैं ही अकेला हूँ? फिर दिल ही जवाब देता है अकेला ज़रूर हूँ, मगर हारा हुआ नहीं हूँ। आज का अकेलापन कल की ताक़त बन सकता है। आज की ख़ामोशी कल की पहचान बन सकती है। और आज के आँसू कल की मुस्कान की वजह भी बन सकते हैं। इसलिए रात चाहे जितनी लंबी हो, सुबह फिर भी आती है। उम्मीद चाहे कितनी भी छोटी हो, वही इंसान को आगे बढ़ने की हिम्मत देती है। अकेले चलना मुश्किल हो सकता है, लेकिन यही सफ़र कई बार इंसान को सबसे मज़बूत बना देता है। Bhagyalakshmi ✍

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