🥀 ख़ुशी ढूँढते हैं लोग दुनिया में… 🥀
ख़ुशी ढूँढते हैं लोग दुनिया में,
मुझे तो अब तन्हाई भी प्यारी लगती है।
जहाँ कोई दिखावा नहीं होता,
वहाँ ख़ामोशी भी अपनी-सी लगती है।
मेरे प्यारे Members,
पहले हम भी महफ़िलों के दीवानी थे,
हर चेहरे में अपना ढूँढ़ते थे,
हर रिश्ते को उम्रभर का साथ समझते थे,
हर मुस्कान पर यक़ीन कर लेते थे।
मगर वक़्त ने धीरे-धीरे
सच्चाई का आईना दिखा दिया।
भीड़ बहुत मिली,
मगर अपना कोई नहीं मिला।
तालियाँ बहुत सुनने को मिलीं,
मगर मुश्किल वक़्त में
कंधा देने वाला कोई नहीं मिला।
तब समझ आया
तन्हाई सज़ा नहीं होती,
कभी-कभी वही सबसे बड़ा सुकून होती है।
तन्हाई में कोई झूठ नहीं होता,
कोई बनावट नहीं होती,
कोई मतलब का रिश्ता नहीं होता,
बस अपना दिल होता है
और अपनी रूह की सच्ची आवाज़ होती है।
अब रात की ख़ामोशी भी
अच्छी लगने लगी है,
चाँद से बातें करना भी
अपना-सा लगने लगा है।
अब अकेले सफ़र करने से डर नहीं लगता,
क्योंकि तन्हाई ने मुझे
खुद से मिलना सिखा दिया है।
उसने सिखाया कि
सबका साथ हमेशा नहीं मिलता,
लेकिन अगर इंसान
खुद का साथ देना सीख जाए,
तो कोई अकेलापन
उसे तोड़ नहीं सकता।
अब न किसी से शिकायत है,
न किसी से कोई उम्मीद।
जो दिल से अपने हैं,
वो बिना बुलाए भी साथ खड़े रहते हैं,
और जो सिर्फ़ मतलब के थे,
वो भीड़ में भी अजनबी ही रहे।
अब ख़ुशी की तलाश
दुनिया में नहीं करता दिल,
क्योंकि असली सुकून
खुद के साथ बैठने में मिलता है।
एक कप चाय,
थोड़ी-सी ख़ामोशी,
खुला आसमान,
और अपने ख़्वाब...
बस इतनी-सी दुनिया ही
अब बहुत प्यारी लगती है।
आख़िर में बस इतना ही...
ख़ुशी ढूँढते हैं लोग दुनिया में,
मुझे तो अब तन्हाई भी प्यारी लगती है।
क्योंकि तन्हाई ने कभी धोखा नहीं दिया,
कभी झूठी उम्मीद नहीं दी,
कभी नकली रिश्तों का बोझ नहीं दिया।
उसने मुझे टूटकर भी
संभलना सिखाया,
रोकर भी मुस्कुराना सिखाया,
और सबसे बड़ी बात
खुद की क़ीमत समझना सिखाया।
अब अगर कोई साथ चले
तो दिल से चले,
और अगर कोई छोड़कर चला जाए,
तो उसके जाने का अफ़सोस नहीं।
क्योंकि मैंने सीख लिया है
जो इंसान अपनी तन्हाई में भी
सुकून ढूँढ लेता है,
उसे दुनिया की कोई महफ़िल
अधूरा नहीं कर सकती।
अब ख़ुशी भी अपने अंदर मिलती है,
और सुकून भी अपनी ख़ामोशी में।
इसलिए लोग चाहे दुनिया भर में
ख़ुशियाँ तलाशते रहें,
मुझे तो अब मेरी तन्हाई ही
सबसे ख़ूबसूरत साथी लगती है।
Bhagyalakshmi ✍